एक बार पुनः मुख्यमंत्री की सीट पर दिखेंगे अरविन्द केजरीवाल

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अरविंद केजरीवाल तात्कालिक भारतीय राजनीति में वह नाम हैं, जिन्होंने अन्ना जन लोकपाल बिल आंदोलन से भारतीय राजनीति की सक्रिय जमीन पर कदम रखन में अपनी तीव्र राजनैतिक सक्रियता से पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था। इन्होंने अन्ना आंदोलन के बाद अपनी राजनैतिक पार्टी बनाई, जिसका नाम है ‘आम आदमी पार्टी’. । आम आदमी पार्टी ने पहली बार दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और एक बेहतर परिणाम के साथ सामने आया। जिन्हें 70 में कुल 28 सीटें प्राप्त हुई थीं। लगभग डेढ़ महीने कांग्रेस के बाहरी समर्थन में सरकार चलाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद लगभग एक वर्ष तक दिल्ली में एलजी का शासन रहा। दूसरी बार जब चुनाव हुए, तो यह परिणाम और भी बेहतर हो गया। इस पार्टी को 70 में से कुल 67 सीटें प्राप्त हुईं, ये एक ऐतिहासिक जीत थी। राजनीति से पहले ये आईआरएस अफसर थे।हरियाणा में जन्मे अरविंद के पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर हैं। और यह एक मध्यमवर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। ये अपने भाई बहनों में सबसे बड़े भाई हैं. इनका अधिकाँश बचपन उत्तर भारत के शहरों में जैसे सोनीपत, गाजियाबाद, हिसार आदि में गुजरा।ये बचपन में हिसार में स्थित कैंपस स्कूल और इसके बाद सोनीपत में स्थित क्रिस्चियन मिशनरी स्कूल के छात्र रहे। इन्होंने यहाँ से अपनी स्कूली पढाई पूरी की। स्कूल के बाद अपने स्नातक के लिये इन्होंने आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया। यहाँ से इन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। अरविंद ने संघ लोक सेवा आयोग में भी अपनी सफलता दर्ज की और आईआरएस अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त हुए। इनका करियर राजनीति से पहले या राजनीति के बाद भी एक सफल करियर के रूप में सामने आता है। आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद इन्होंने सन 1989 में टाटा स्टील से अपना करियर शुरू किया। इनकी पोस्टिंग जमशेदपुर की गयी थी। तीन वर्ष यहाँ कार्य करने के बाद सन 1992 में इन्होंने अपना पहला इस्तीफा दिया, ताकि सिविल सर्विस की तैयारी कर सकें। जिसमें इन्हें सफलता प्राप्त हुई और यहाँ से ये भारत सरकार के अधीन काम करने लगे। यहीं से इन्होंने राजनीति की जमीनी पहलुओं ठीक से समझा।अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे के जनलोकपाल आंदोलन में बहुत सक्रियता से कार्य किया। किन्तु कोई सीधा लाभ न मिल पाने की वजह से आंदोलन का उद्देश्य सफल नहीं हो पा रहा था। अरविंद ने जनलोकपाल बिल के मुद्दे से राजनीति में कदम रखा। जिनके अनुसार जब वे आईआरएस अफसर के रूप में कार्य कर रहे थे, तो उन्हें अक्सर भ्रष्टाचार जैसी समस्या का सामना करना पड़ता था. इसी वजह से उन्होंने इस नौकरी को छोड़ा था।अरविंद केजरीवाल अपने करियर के आरंभिक दिनों से ही सामाजिक कार्यों में रूचि लेने लगे थे। इन्होंने टाटा स्टील जमशेदपुर से इस्तीफा देकर एक तरफ सिविल सर्विस की तैयारी की, तो वहीँ दूसरी तरफ कोलकाता में रहते हुए इन्होंने मदर टेरेसा से भेंट की। इन्होंने मदर टेरेसा के आश्रम में दो महीने तक कार्य किया। इसके बाद इन्होंने ‘क्रिश्चियन ब्रदर्स एसोसिएशन’ के साथ कार्य किया। अरविंद ने गाँवों के लिए ‘राम कृष्ण मिशन’ के साथ जुड़ कर विभिन्न तरह के कार्य किये। कालांतर में इन्होंने ‘नेहरु युवा केंद्र’ को अपने समाज कल्याण कार्य का मंच चुना। इन्होंने आयकर विभाग में काम करते हुए ‘परिवर्तन’ नामक जन आंदोलन की शुरुआत की। इस जन आंदोलन के माध्यम से इन्होंने दिल्ली में होने वाले राशन कार्ड को लेकर जो स्कैम का पर्दाफाश किया था।केजरीवाल अफसरी करते हुए सरकारी तंत्र में गहरे बैठे भ्रष्टाचार को अच्छे से समझ गये थे। उन्हें ये बात भी समझ में आ गयी थी कि इस तंत्र में अफसरी करते हुए भ्रष्टाचार को काबू में नहीं किया जा सकता है। इन्होंने सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देते हुए वर्ष 2006 में आयकर विभाग के ‘जॉइंट कमिश्नर’ पद से इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे के बाद वे लगातार सामाजिक मुद्दों से जुड़े रहे और समाधान के रास्ते ढूंढते रहे। इन्होंने अन्ना के आंदोलन में भाग लिया जहाँ उन्हें पार्टी बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। नवम्बर 2012 में इन्होंने आम आदमी पार्टी की नींव रखी।वर्ष 2005 में इन्हे आईआईटी खड़गपुर की तरफ से सत्येन्द्र के. दुबे अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड इन्हें सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की वजह से दिया गया। वर्ष 2006 में परिवर्तन जनआंदोलन के नेतृत्व करने की वजह से इन्हें रमन मेगसेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इन्होंने इस अवार्ड की राशि एक एनजीओ को दान कर दी थी।इन्होंने जब से राजनीति में कदम रखा है, वे विवादों के घेरे में आते रहे हैं. इनके ऊपर कई धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं, कई नेताओं ने इन पर मानहानि के मुकदमे चलाये।इन्हें हिंदी फिल्में देखनी बेहद पसंद है। वो आमिर खान के अभिनय के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उनकी लगभग हर फिल्म देखते हैं। आईआरएफ अफसर होने के दिनों में इन्होंने चपरासी की सेवा नहीं ली और ये प्रतिदिन अपना डेस्क खुद साफ करते थे। इनकी और इनकी पत्नी की मुलाकात ‘नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ में वर्ष 1994 में हुई थी। वहीं से इनके रिश्ते आगे बढे।अरविन्द केजरीवाल एक बार फिर बहुमत से जीत हासिल कर दिल्ली की कुर्सी में विराजमान हो गए है। दिल्ली की जनता ने उन्हें जिताकर एक बार फिर मौका दिया है।

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