भारत सोने की चिड़िया था है और रहेगा, स्वदेशी अपनाएं, देश की अर्थ व्यवस्था को सुदृढ बनाए

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चीन के कोरोना वायरस के कारण हुई त्रासदी से आभास होता है कि हम आज भी आजाद नही। इस बात में कोई दौराय नहीं है कि भारत सोने की चिड़िया है। काफी समय तक भारत मुगलों अंग्रेजों के कारण गुलाम रहा हमें आजादी तो मिली परंतु सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार ने विकास की राह रोक दी। इस बात का आभास आज चीन मे कोरोना वायरस के कारण हुई त्रासदी से पता चलता है कि आज भी हम गुलाम है। उदाहरण चरितार्थ करता है कि हिंदुस्तान में बढ़िया वातावरण, बेहतर ढांचा, कृषि पर्यटन तथा क्षेत्र में आगे हैं परंतु नकारात्मक विचारों के कारण समाज सोया हुआ है। दुख होता है एक और तो हम व्यापार के साथ शीघ्र मुनाफा चाहते हैं परंतु वह नकारात्मक मानसिकता के कारण संभव नहीं। देखने में यह भी आता है कि भारतिय युवा शीघ मेहनत का परिणाम चाहता है जो संभव नहीं है। चीन में करोना वायरस के कारण जो हाल हुआ है वह किसी से छुपा नहीं है। विश्व के इतिहस में पहली बार ऐसा हुआ है कि मात्र 15 दिन में इस बीमारी ने शरीर को पंगु बना दिया है चीन में प्रभावित व्यक्ति को गोली से उड़ाया जा रहा है भारी संख्या में पुनर्जन्म में हुईं— कृतियों के कारण उनकी हत्या हुई होगी। चीन निवासी करीब 150 जीव जंतुओं को अपने खानपान में प्रयोग में लाते थे तथा पूर्व से मांसाहारी थे जिसके परिणाम स्वरूप और वहां त्रासदी आ ही गई है। यदि विश्व में एक दिन उद्योग व सरकारी कार्यालय बंद हो जाए तो अर्थव्यवस्था हिल जाती है तथा चीन मे तो अर्थव्यवस्था प्रभावित होने को काफी दिन हो गए हैं। करीब 95 फीसदी खिलौने इलेक्ट्रॉनिक सामान ऑटो पार्ट्स मोबाइल कच्चा माल, डिस्पोजेबल वस्तुऐ सब वहाँ से आती है जिस कारण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है महंगाई दुगने दाम तक पहुंच गई है। यदि ऐसा ही रहा तो भविष्य में दवाइयां कम पड़ जाएगी। हैरत इस बात की है कि सरकार ने प्लास्टिक पॉलीबैग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है परंतु यह आइटम अभी भी वहीं से आ रही है भारत कहां खड़ा है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। मौजूदा समय में पूरा प्रभाव दिख रहा है चीन जहां की आबादी के करीब 6000 लोग अभी भी घरों में ही जेल जैसा जीवन गुजर बसर कर रहे हैं जो उनके द्वारा किये दुषकर्म का परिणाम है। विश्व की सरकारों व समस्त समाज को ऐसा सँयुक्त अभियान चलाना चाहिए जिससे लोगों को शाकाहारी प्रवृति बारे प्रेरित करने हेतु जीव जंतु वनस्पति प्रकृति से खिलवाड़ ना कर सही जीवन जीने की राह दिखाई जाए ताकि चीन जैसा हाल ना हो तभी भारत सोने की चिड़िया की
कहावत को चरितार्थ कर पाएगा। सरकारों को चाहिए कि चीन की इस घटना से सबक ले व भविष्य में विदेशी माल को उसकी गुणवत्ता सहित उपलब्ध कराएं। यहां के अर्थशास्त्रियों को ऐसा ढांचा पैदा करें कि कोई भी ऐसा उत्पाद नहीं बनेगा जो स्वरोजगार की राह से आया हो व गुणवत्ता युक्त न हो। चीनी कोरोना वायरस पूरे विश्व के लिए संदेश लाया है कि सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को इसने हिला कर रख दिया है। सरकारों को चाहिए कि प्रत्येक वस्तु प्रयोग मे होने वाली भारत में पैदा हो। अर्थशास्त्रियों को चाहिए कि कि वे बेहतर गुणवत्ता कम मुनाफे की तरफ जाकर कुछ समय हेतू किसी समस्या में आए देश के साथ ऐसा व्यवहार ना करें , क्योंकि आज भारत 50 पैसे में बिकने वाला मास्क चीन को करीब रू 25 में भेज रहा है जो सही नहीं है। याद आता है कि भारत वासी विश्वगुरू न बन कर बल्कि रातों-रात अरबपति बनने के सपने में डूबे हुए हैं। उन्हें आभास नहीं की कम समय की कमाई उनके जीवन उपयोग हेतु पूर्ण नहीं है बल्कि यह केवल क्षणिक सुख के लिए है। देखने में आता है कि सरकार चीन जैसा आविष्कार जाता है स्वदेशी का राग आपला कर दिखावा कर रहा है परंतु चीन में आए करोना वायरस की त्रासदी से आभास होता है कि हम किस कगार पर खड़े हैं व मंदी से जूझ रहे हैं। दैनिक जीवन के साथ जुड़ी वस्तुएं 90 फीसदी के लिए हम केवल चीन पर निर्भर हैं यहां तक कि मानव के जीवन के मुख्य अंग हेतू सर्जिकल सामान चीन से ही आता है तो भारत इस बात को सम्हज सकता है। कि इस दिशा में कहां खड़ा है। यह चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए कि अभी हम अपने भविष्य की पीढ़ी को स्तापित करने हेतु कुछ नया करें। सरकारों का उद्देश्य होना चाहिए कि दूषित व गंदी राजनीति को छोड़ देशहित की पवित्र आत्माओं शहीद भगत सिंह, राजगुरु , सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस को याद कर सही दिशा में कदम बढ़ाए। शहीदों का बलिदान तभी सफल होगा जब हम भ्रष्टाचार छोड़ देश में अर्थव्यवस्था मजबूत कर स्वरोजगार के द्वार खोल स्वदेशी समान बना इसका निर्यात कर सकेंगे तभी विश्व में भारत का डंका बजेगा वह विश्व गुरु का सपना साकार होगा।

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