सीएए को लेकर बबाल कहॉं तक उचित

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लोकतंत्र में विरोध करने की स्वतन्त्रता होनी ही चाहिए तथा विरोध को देशदोह की तरह नहीं देखा जाना चाहिए लेकिन जिस तरह नागरिका कानून पर बवाल हो रहा है और दिल्ली में कानून व्यवस्था पूरी तरह ठप्प है और आराजक तत्व जगह-जगह आगजनी व तोड़-फोड़ कर रहे हैं वह नितांत ही दर्दनाक है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में पिछले दो दिनों में नागरिकता कानून पक्ष और विपक्ष दो गुटों में बंट गये हैं और चॉंद बाग, सलीमपुर, मोजपुर, जाफराबाद सहित दिल्ली के अनेकों इलाकों में लोग विध्वंसक कार्यवाही कर रहे हैं जो हिंसक भीड़ घरों, दुकानों और वाहनों में आग लगा रही है ऐसा लग रहा है मानो भारत की राजनीति दिल्ली में कोई भी कानून व्यवस्था नहीं नहीं रह गई है। और एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह उस समय हुआ जब पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत पहुॅंचे और उनका शानदार स्वागत चल रहा है।  नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के एक बड़े भू-भाग में हिसंक प्रदर्शन जारी है। यहॉं तक कि गोकुलपुरी में तो एक पुलिस हैडकांस्टेबल की मौत भी हो गई और अनेकों पुलिस कर्मियों सहित शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा तक घायल हो गये। दो नागरिक भी गोली लगने से मारे गये। अनेकों स्थानों पर पुलिस को हलका व भारी बल प्रयोग करने के लिए भी विवश होना पड़ा। भीड़ की हिम्मत को दाद देनी होगी कि कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर एक शख्स ने तो बीच सड़क पर खुलेआम तमंचे से कई गोलियां दागी।  देश की राजधानी दिल्ली में जिस तरह तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है वह बेहद चिंताजनक है। पिछले करीब दो माह से जो सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शनों को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हिंसा का माहौल पैदा किया गया उससे दिल्ली में कई इलाकां में जो हिंसा से सवाल खड़े हुए हैं क्या उससे किसी भी समस्या का समाधान संभव है। किसी मुद्दे या विवाद को सुलझाने का मुद्दा अगर बातचीत है तब तो किसी समाधान तक पहुॅंचा जा सकता है लेकिन दोनों पक्ष न केवल आमने-सामने आए है बल्कि उनके बीच टकराव भी शुरू हो गया है।  देखना यह है कि यदि विरोध और समर्थन में खड़े लोग हिंसा और टकराव का रास्ता नहीं छोड़ते तो इसका खमियाजा पूरे देश को ही भुगतना पड़ सकता है। लेकिन दूसरी ओर लोकतंत्र में विरोध करने की स्वतन्त्रता भी होनी चाहिए।  हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि आजकल विरोध को जो देशद्रोह की तरह देखा जा रहा है उस विरोध को देशद्रोह मानकर जो कार्यवाही की जा रही है उस पर चिंता व्यक्त की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसियेशन द्वारा लोकतंत्र व विरोध विषय पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने साफ तौर पर कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिए। विरोधी सुरों को प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए और बातचीत के जरिए देश को सही तरीके से चलाना भी चाहिए। लेकिन दूसरी ओर विरोध के नाम पर जो विध्वंसक कार्यवाही हो रही है उस पर अंकुश लगाना ही चाहिए और देश की सम्पत्ति का नुकसान न हो इसके लिए सरकार को उचित कदम उठाने ही होंगे।

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