गांव के विकास के लिए तत्पर रहते हैं चौधरी बलवीर सिंह

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हरियाणा प्रदेश के जिला यमुनानगर के अन्तर्गत आने वाले ग्राम कलेसर में 25 दिसम्बर 1957 को जन्में बलवीर सिंह जहॉं सामाजिक कार्यों में रूचि रखते हैं वहीं इन्हें जानवरों से भी काफी लगाव है। गांव में विकास में भी चौधरी बलवीर सिंह हमेशा अग्रणी रहते हैं तथा लोगों को समय-समय पर पर्यावरण के प्रति जागरूक करना भी इनका मुख्य ध्येय है। आरएसएस से वर्ष 1971 से जुड़े हैं तथा आर.एस.एस के कैंप भी इन्होंने गुरू की नगरी पांवटा साहिब में ही पहली बार अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराई थी। यही नहीं वर्ष 1980 में इन्होंने वन रक्षा अन्दोलन संस्था में कार्य करना शुरू किया जिसमें जंगलों के अवैध कटान को रोकने की मुहिम चलाई जो आज भी जारी है और वन रक्षा आन्दोलन का इन्हें जनरल सेक्रेटरी भी बनाया गया। इनकी संस्था के प्रयासों से ही कलेसर नेशनल पार्क ( राष्ट्रीय उद्यान वन्य प्राणी ) खोला गया जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव जन्तु हाथी, हिरण, चित्तल, सांबर, काकड़, जैसे जीव जन्तु रह रहे हैं। यह पार्क सैलानियों के लिए भी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित है। इसके अलावा यह कालेश्वर महादेव मठ के कमेटी सदस्य भी हैं।  बलवीर सिंह के पिता चौधरी हेमराज तथा माता बोती देवी थी। पिता का गांव कलेसर में ही खेतीबाड़ी का कार्य था। इनके 3 भाई व 3 बहनें हैं। भाईयों में सबसे बड़े भाई शिताब सिंह चौधरी, पवन सिंह चौधरी तथा साहब सिंह चौधरी हैं तथा बहनों में दो बहनों का तो स्वर्गवास हो गया है जबकि एक बहन सरोज बाला अपना वैवाहिक जीव न सुखपूर्वक बिता रही हैं।  चौधरी बलवीर सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा गांव कलेसर से शुरू हुई तथा जहॉं से प्राइमरी की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में स्थित पांवटा तहसील के अन्तर्गत आने वाले माजरा से इन्होंने कक्षा 7वीं तक की शिक्षा ग्रहण की जहॉं इनके बड़े भाई शिताब सिंह लेक्चरर के पद पर सेवारत हैं जो जेबीटी के बच्चों को इतिहास विषय का प्रशिक्षण दिया करते थे। उसके बाद जब इनके भाई का स्थानान्तरण कफोटा में हुआ तो यह भी अपने भाई के साथ चले गये और कक्षा 10वीं की शिक्षा इन्होंने कफोटा से हासिल की। उसके बाद मुकन्द लाल कॉलेज यमुनानगर से इन्होंने 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण की और फिर स्नातक की डिग्री भी उसी कॉलेज से ग्रहण करने के दौरान ही इनके पिता जी का देहान्त हो गया और इन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और पिता जी की खेती-बाड़ी के कार्य को संभाला।  इनके बचपन के मित्रों में चौधरी किरनेश जंग, पूर्व विधायक पांवटा दून क्षेत्र, छछरौली से विधायक रहे स्व. असलम खान, वर्तमान शिक्षा मंत्री चौ. कवंर पाल गुज्जर, शिक्षाविद् सुलेख भारद्वाज को मानते हैं। सुलेख भारद्वाज जिनका अभी हाल ही में देहावसान हो गया है, से इनके पारिवारिक सम्बन्ध हैं तथा वह इनके मार्गदर्शक भी रहे हैं।  दुनिया में सबसे अधिक स्नहे जहॉं यह अपनी माता जी को करते हैं वहीं इन्हें अपने बड़े भाई से सबसे अधिक स्नेह मिला है तथा ईष्ट मित्रों से भी यह काफी स्नेह करते हैं।  चौधरी बलवीर सिंह का विवाह हरियाणा प्रदेश के अन्तर्गत आने वाले ग्राम भीलपुरा निवासी संतोष से वर्ष 1978 में हुआ जिनसे दो बेंटे इनके जीवन बहार में आए। बड़ा बेटा रमन तंवर तथा छोटा रंजन तंवर हैं। रमन जहॉं ओबीसी बैंक बराड़ा मे मैनेज़र के पद पर हैं वहीं रंजन ने वकालत की पढ़ाई की है तथा जगाधरी कोर्ट में प्रेक्टिशनर हैं। आदर्श शिक्षक का दर्जा यह अपने बड़े भाई शिताब सिंह चौधरी को देते हैं।  खेलों में इन्हें किक्रेट काफी पसन्द हैं तथा खिलाड़ियां में कपिल देव को पसन्द करते हैं। जब कपिल देव ने 1983 में वर्ल्ड कप जीता वह दिन इनके लिए बेहद खुशी का था। इन्हें सबसे अधिक कभी-कभी फिल्म ने प्रभावित किया तथा अभिनेताओं में जहॉं अभिताभ बच्चन, शशि कपूर, को पसन्द करते हैं वहीं हेमा मालिनी, जया बच्चन इनकी पसन्दीदा अभिनेत्रियां हैं। गानों में यह अधिकतर किशोर कुमार के गीतों को पसन्द करते हैं।  राजनीतिज्ञों में यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पसन्द करते हैं। अपने जीवन में सबसे अधिक खुशी इन्हें अपने बेटे की नौकरी लगने वाले दिन हुई थी तथा दुःख सबसे अधिक अपने पिता जी के निधन पर हुआ। उसके बाद जब इनके बड़े भाई चौ.शिताब सिंह की एक दुर्घटना में मृत्यु हुई वह पल भी इनके जीवन में बेहद दुःखद रहे हैं।  खाने में इन्हें जहॉं दाल-रोटी, बाजरे की रोटी तथा साग पसन्द हैं वहीं अपनी सफलता का श्रेय यह ईश्वर को देते हैं। पूजा पाठ में इनकी गहरी आस्था है। पत्नी से बड़े मधुर सम्बन्ध हैं जो हर कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर इनके साथ रहती है।

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