Homeहिमवन्ती की बातसौम्या तुम्हें सलाम

सौम्या तुम्हें सलाम

सौम्या सांबशिवन जिला सिरमौर में पुलिस प्रमुख के तौर पर कार्य कर चुकी हैं। मुझे भी सौम्या को बहुत करीब से देखने का मौका मिला है। मैं कभी किसी भी अधिकारी में कार्यालय में जाने से परहेज करता हूॅं लेकिन कई बार मुझे सौम्या के दफ्तर में जाने का मौका मिला और कई बार उनकी कार्यप्रणाली को नज़दीक से देखने का मुझे मौका मिला और मैं उनके स्वभाव व कार्यप्रणाली से उनका मुरीद होने से अपने आपको रोक नहीं पाया। सौम्या का दुर्गा रूप भी मैंने कई बार देखा और शीतला का रूप भी । सौम्या को एक दबंग पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है और जब शिमला में चर्चित गुड़िया गैंगरेप प्रदेश ही क्या देश भर के अखबारों की सुर्खियों में था और शिमला में कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी थी तो 2010 के बैच की इस आईपीएस अफसर को शिमला का पुलिस अधीक्षक बनाकर तत्कालीन सरकार ने भेज दिया था। सौम्या ने विपरीत परिस्थितियों व राजनीतिक दखल अन्दाजी के बावजूद उस मामले को काफी अच्छे तरीके से सुलझाने की कोशिश की और पुलिस कस्टडी में सूरज नामक एक नेपाली को मारे जाने पर जो उसके परिवार व लोगों में गुस्सा था उसको मर्रहम लगाने की कोशिश की और सूरज की पत्नी को लाड प्यार से अपने हाथों खाना खिलाया तो ऐसा लगा कि मानो उनका शीतला माता का रूप सामने आ गया हो।  आज भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खा रहा है और उच्च अधिकारी भी अपने पद का दुरूपयोग कर रहे हैं। उन्होंने एक मशहूर उद्योग से ऐसा खास स्प्रे भी बनवाया जिसे स्कूली छात्राओं को मनचलों पर उस स्प्रे को इस्तेमाल करने के लिए दिया। जिसके असर से मनचले आधा घंटे तक तो आँख भी नहीं खोल सकते। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को आजादी के बाद पहली महिला एसपी का पद मिला था जब गुड़िया गैंगरेप व मर्डर केस की वज़ह से कानून व्यवस्था पूरी तरह ठप्प थी। सौम्या की गिनती सूबे के निडर अफसरों में होती है। सिरमौर में ड्रग्स शराब और मानव तस्करी के बढ़ते मामलों पर इस अधिकारी ने भी लगाम लगाई थी और अनेकों ब्लांईड मर्डर केस भी इनके कार्यकाल में सुलझे थे।गुड़िया मर्डर केस में एक निर्दोष कहे जाने वाले नेपाली मजदूर सूरज की मौत पर कई प्रश्न उठे और उसमें आई जी स्तर के पुलिस अफसर भी दोषी के रूप में जेल की सिखंचो में बंद रह चुके हैं लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते अब जेल से बाहर हैं। आई जी जैदी उस समय आईजी के पद पर तैनात थे जब सौम्या शिमला की एसपी थी।अभी हाल ही में जैदी जमानत पर छुटे हैं और वह एक उच्च अधिकारी होने के नाते सौम्या पर अदालत में गलत गवाही देने के लिए दबाव बना रहे थे तो निडर सौम्या ने इस बात का खुलासा अदालत में कर सनसनी फैला दी है। प्रदेश की जयराम सरकार ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए आईजी जैदी के खिलाफ कठोर कदम उठाने का मन बनाया है जो निश्चय ही ईमानदार अधिकारियों की जीत कही जा सकती है लेकिन सौम्या ने जिस तरह अपने से काफी उच्च पद पर आसीन अधिकारी के खिलाफ झंडा बुलन्द किया है उससे उनकी जितनी सराहना की जाए वह कम है। इससे सरकार को भी इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और सौम्या सांबशिवन को जहॉं हर तरीके की सुरक्षा देनी चाहिए वहीं जैदी जैसे अफसरों के खिलाफ भी कठोर से कठोर कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए जिससे कोई भी अधिकारी अपने अधिनस्थों पर अनावश्यक दबाव न डाल सके।

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