तिखा हुआ दिल्ली का रण

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जैसे -जैसे चुनाव की तिथि नज़दीक आ रही है वैसे -वैसे चुनाव प्रचार का रंग तिखा होता जा रहा है। जनता द्वारा निर्वाचित मुख्यमंत्री को भी आतंकी कहने में केन्द्रीय सत्तासीन सरकार के नेता पीछे नहीं हट रहे हैं वहीं आतंकी कहने पर आप भी आपे से बाहर हो रही है और केजरीवाल तो गिरफ्तार करके दिखाये ऐसा चेलेंज कर रही है और यह सब चुनाव आयोग की मौजूदगी में हो रहा है। राजनीतिक पंड़ितों का कहना है कि इस बार के चुनाव में जिस तरह की भाषा प्रयोग की जा रही है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। केन्द्रीय मंत्री अपने आका मोदी को खुश करने के लिए अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं वहीं आप के प्रतिनिधि भी तिखे शब्दों का प्रयोग करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।  दिल्ली में आधी से अधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश और बिहार के अप्रवासियों की है जो बरसों से दिल्ली में रह रहे हैं और वहीं उनके आशियाने भी हैं। सभी को पता है कि इन अप्रवासियों का दिल्ली की राजनीति में पूरा दखल है और गत चुनाव में इनके वोटों की बदौलत ही आप पार्टी सत्तासीन हुई थी। इसी से भयभीत होकर मोदी भी चुनावी मैदान में उनकी वकालत करते दिखाई दे रहे हैं।  जहॉं भाजपा के दिग्गज केजरीवाल को देश के दुश्मनों का हमदर्द बताने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है वहीं केजरीवाल अपने विकास के एजेंडें के सहारे अपनी नैया पार कराने में जुटे हैं। गत पांच वर्षों का रिकॉर्ड पेश करते हुए सत्तारूढ़ आप पार्टी फिर से सत्तासीन होना चाह रही है और इसके लिए तीन दिनों में आम पार्टी के कार्यकर्ता और नेतागण 15 हजार बैठकें करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने चुनाव के नजदीक आते ही अपनी टैग लाईन भी बदल दी है। अब उसके कार्यकर्ताओं ने नया नारा दिया है-अच्छे होंगे पॉंच साल, दिल्ली में तो केजरीवाल यह नारे दिल्ली की गली-गली में गूंज रहे हैं। वहीं मोदी ने भी अपने सभी केन्द्रीय मंत्रियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा, उत्तरांचल के मंत्रियों को भी चुनावी समर में पूरी तरह झोंक दिया है। हिमाचल से भी भारी संख्या में भाजपा नेता दिल्ली के चुनावी प्रचार में जुटे हैं और हिमाचल प्रदेश सचिवालय सूना-सूना सा है। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह के साहबजादे विक्रमादित्य सिंह ने तो हिमाचल सरकार पर यहॉं तक आरोप जड़ दिया है कि पूरी हिमाचल सरकार दिल्ली चुनाव में व्यस्त है और सचिवालय से मंत्री तो क्या अधिकारी भी पूरी तरह से नदारद हैं और प्रदेश सचिवालय भूत बंगला सा नज़र आ रहा है।  खैर चुनावों की तिथि नजदीक आती ही जा रही है और भाजपा और उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी अपना-अपना पूरा जोर जीतने के लिए लगा ही रहे हैं लेकिन कांग्रेस की उपस्थिति चाहे थोड़ी बहुत ही है लेकिन वह निश्चित तौर पर अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के लिए सहायक होगी। चुनाव में जिस तरह अमर्यादित भाषा का प्रयोग हो रहा है इसे किसी भी तरह जायज नहीं कहा जा सकता। जामिया और शाहीनबाग मामला भी खूब उभर रहा है, सत्ता के दावेदार दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगे हैं।

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